उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट्स एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स (IAPM) और इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ पैथोलॉजिस्ट्स – इंडियन डिविजन (IAP-ID) के 73वें वार्षिक सम्मेलन एपीकॉन 2025 का उद्घाटन सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) जम्मू में किया।
पांच दिवसीय सम्मेलन का विषय “पैथोलॉजी में उभरते रुझान: मॉर्फोलॉजी से मोलेक्यूलर इनसाइट्स तक” है, जिसमें देशभर के प्रमुख पैथोलॉजिस्ट्स और माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स हिस्सा ले रहे हैं।
अपने मुख्य संबोधन में एलजी सिन्हा ने कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली को डायग्नोस्टिक सटीकता और उपचार में लगने वाले समय को कम करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने Artificial Intelligence (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स को पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक्स में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
“प्रिसिजन मेडिसिन को मुख्यधारा में लाना और आधुनिक डायग्नोस्टिक टेस्टिंग को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है,” उन्होंने कहा। सिन्हा ने सुझाव दिया कि लैब्स को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहिए ताकि मेडिकल डेटा को डॉक्टरों के लिए उपयोगी क्लिनिकल इनसाइट में बदला जा सके।
उन्होंने दो प्रमुख सुझाव दिए:
- पैथोलॉजी क्षेत्र को अत्याधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाया जाए और बहुविषयक शोध के माध्यम से मानक उपचार प्रोटोकॉल विकसित किए जाएं।
- शैक्षिक कार्यक्रमों में मौजूद कमियों को दूर कर नए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएं।
एलजी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव हुए हैं। उन्होंने दूरदराज़ क्षेत्रों में ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) को विस्तार देने और छोटे स्वास्थ्य केंद्रों को बड़ी लैब्स से जोड़ने पर जोर दिया।
“हमारा लक्ष्य हर नागरिक को आधुनिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर दूरस्थ इलाकों में समर्पित डायग्नोस्टिक सुविधाएँ विकसित करें,” उन्होंने कहा।
समारोह में उपस्थित रहे:
- डॉ अशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल GMC जम्मू
- डॉ उषा किन्नी, अध्यक्ष IAPM
- डॉ रीनी मलिक, उपाध्यक्ष IAPM
- डॉ रंजन अग्रवाल, मानद सचिव IAPM
- IAPM और IAP-ID के पदाधिकारी
- वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट और मेडिकल प्रोफेशनल
इसके अलावा अरविंद गुप्ता, विधायक जम्मू पश्चिम; डॉ सैयद आबिद राशीद शाह, सचिव स्वास्थ्य एवं मेडिकल शिक्षा; और कई वरिष्ठ सिविल व पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे।


