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Thursday, January 15, 2026

डीजीपी सक्सेना के निर्देश से सुरक्षा में होगी बढ़त: दिल्ली

दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने लाल किले के पास हुए गंभीर विस्फोट के बाद सुरक्षा उठाए कदम बढ़ाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए। यह धमाका 10 नवंबर को हुआ, जिसमें 15 लोगों की जान गई। इस घटना के मद्देनजर, सक्सेना ने राजधानी में सुरक्षा और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं, जिन्हें 19 नवंबर को पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा और मुख्य सचिव राजीव वर्मा को भेजा गया।

विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग किया गया, जिसके कुछ ही दिन पहले एक अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने से 3,000 किलो विस्फोटक जब्त किया गया था। इस तंत्र को ध्यान में रखते हुए, उपराज्यपाल ने अमोनियम नाइट्रेट की डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य सुरक्षा उपायों को अनिवार्य किया।

उपराज्यपाल ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अमोनियम नाइट्रेट की एक निश्चित मात्रा से अधिक खरीदने-बेचने वाले सभी व्यक्तियों और संस्थानों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए।

इसके लिए, पुलिस को 2022 के स्टैंडिंग ऑर्डर की फिर से समीक्षा करने का आदेश दिया गया है। डिजिटल रिकॉर्ड में खरीदार और विक्रेता की तस्वीरें, पहचान संबंधी विवरण, खरीदने या बेचने की मात्रा और अन्य आवश्यक जानकारी शामिल होंगी।

सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए, एलजी ने पुलिस से कहा कि Meta, X जैसी सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बैठक आयोजित कर कट्टरपंथी और भ्रामक सामग्री की निगरानी की योजना बनाई जाए। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि समुदायों और नागरिकों के साथ संवाद को बढ़ावा दिया जाए।

इसके अलावा, डीसीपी को आदेश दिया गया है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों का सुरक्षा ऑडिट करें, जिसमें शामिल होंगी: बाजार, ISBT, रेलवे स्टेशन, सिनेमा हॉल, पार्क और मेट्रो स्टेशन। ऑडिट में सीसीटीवी कवरेज, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और बीट रोस्टर की जांच की जाएगी।

एलजी ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जाए। खासकर निजी अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों का डेटा भी इसमें शामिल किया जाएगा। विदेश से प्राप्त डिग्री रखने वाले मेडिकल प्रोफेशनल्स की जानकारी पुलिस के साथ साझा कर द्वितीयक सत्यापन किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, दूसरे-हाथ वाहनों की बिक्री-खरीद के दौरान कड़े नियम लागू किए जाएंगे। डिजिटल प्लेटफार्मों और वित्तीय संस्थानों के साथ विचार-विमर्श कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी ऐसा वाहन सड़क पर न चल सके जिसका वास्तविक मालिक पंजीकृत मालिक से अलग हो।

वी. के. सक्सेना ने स्पष्ट किया कि यह कदम खासकर ऑटो-रिक्शा सेक्टर में वाहन के स्वामित्व में आने वाली समस्या को सुलझाने के लिए उठाया गया है।

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