बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि उनकी देश में वापसी तभी संभव है जब “भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र” की बहाली हो, अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए और स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव कराए जाएँ।
भारत में अज्ञात स्थान से PTI को भेजे एक विशेष ईमेल इंटरव्यू में, हसीना ने निर्वाचित न होने वाली यूनुस-नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर “भारत से रिश्ते खतरे में डालने” और “कट्टरपंथी ताकतों को मजबूत करने” का आरोप लगाया।
उन्होंने भारत सरकार का आभार जताते हुए कहा, “भारत की सरकार और यहाँ के लोगों का मैं अत्यंत आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे शरण और आतिथ्य दिया।”
‘लोकतंत्र की बहाली ही मेरी वापसी की शर्त’
हसीना ने कहा, “मेरी वापसी की सबसे महत्वपूर्ण शर्त वही है जो बांग्लादेश की जनता की भी है—भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र की बहाली।”
उन्होंने मांग की कि अंतरिम प्रशासन को अवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध वापस लेना चाहिए और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने चाहिए।
78 वर्षीय हसीना 5 अगस्त 2024 को देश छोड़कर भारत आईं, जब हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने उन्हें इस्तीफा देने और देश से निकलने पर मजबूर कर दिया।
प्रदर्शनों को लेकर सरकार की “नाकामी” पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्वीकार किया, “हाँ, हम स्थिति पर नियंत्रण खो बैठे थे—यह दुर्भाग्यपूर्ण था,” लेकिन साथ ही ज़िम्मेदारी “छात्र नेता बनने का ढोंग करने वाले राजनीतिक फायरब्रांडों” पर भी डाली।
चुनाव बहिष्कार के आरोप खारिज
हसीना ने उन रिपोर्टों को खारिज किया जिनमें कहा गया कि उन्होंने अगले साल फरवरी में होने वाले चुनावों के बहिष्कार की अपील की है।
उन्होंने कहा कि अवामी लीग को बाहर रखकर कोई भी चुनाव वैध नहीं माना जा सकता।
यूनुस सरकार पर कड़ा हमला
हसीना ने अंतरिम प्रमुख डॉ. मोहम्मद यूनुस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी “भारत विरोधी सोच” बांग्लादेश के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संबंध को कमजोर कर रही है।
हसीना ने कहा, “यूनुस का भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया मूर्खतापूर्ण और आत्मघाती है… वह अराजक, अलोकतांत्रिक और चरमपंथियों के समर्थन पर निर्भर हैं।”
उन्होंने भारतीयों को आश्वस्त करते हुए कहा, “अंतरिम सरकार हमारे देशवासियों की सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करती। भारत हमेशा हमारा सबसे महत्वपूर्ण मित्र रहेगा।”
अंतरराष्ट्रीय निगरानी में मुकदमे का सामना करने को तैयार
हसीना ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय निगरानी, यहाँ तक कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में भी मुकदमा झेलने को तैयार हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस इससे बच रहे हैं क्योंकि “निष्पक्ष अदालत मुझे बरी कर देगी।”
उन्होंने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल—जहाँ अभियोजक उनके लिए मौत की सज़ा की मांग कर रहे हैं—को “कंगारू कोर्ट” बताते हुए खारिज कर दिया।
हसीना के मुताबिक, यूनुस को पश्चिम के कुछ उदार वर्गों का “कम से कम मौन समर्थन” मिला, लेकिन अब यह समर्थन घट रहा है क्योंकि “वे देख रहे हैं कि वह कट्टरपंथियों को कैबिनेट में शामिल कर रहे हैं, अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव कर रहे हैं और संविधान को कमजोर कर रहे हैं।”


