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Thursday, January 15, 2026

12 साल बाद उदयपुर में 213 गृहखरीदारों को मिली राहत, ईडी ने 175 करोड़ की संपत्ति लौटाई

बारह वर्षों से अपने घर का इंतज़ार कर रहे 200 से अधिक गृहखरीदारों को बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजस्थान के उदयपुर स्थित रॉयल राजविलास (RRV) प्रोजेक्ट की ₹175 करोड़ मूल्य की फ्लैट्स, वाणिज्यिक इकाइयाँ और प्लॉट गृहखरीदारों को वापस कर दिए हैं।

ईडी के अनुसार, बहाल की गई संपत्ति में 354 अनबिके फ्लैट्स, 17 वाणिज्यिक इकाइयाँ और 2 प्लॉट शामिल हैं।

यह मामला भारत बॉम्ब और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जिन पर 2011 से 2016 के बीच सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) को ₹1,267.79 करोड़ का चूना लगाने का आरोप है।

ईडी ने अप्रैल 2019 में इस केस में ₹535 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच की थीं, जिसमें उदयपुर एंटरटेनमेंट वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड (UEWPL) की ₹83.51 करोड़ की अनबिकी संपत्तियाँ भी शामिल थीं।

बाद में कंपनी को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT), मुंबई में दिवालियापन प्रक्रिया के तहत भेजा गया। फरवरी 2022 में एनसीएलटी ने समाधान योजना को मंजूरी देते हुए ईडी के अटैचमेंट आदेश को रद्द कर दिया।

हालाँकि, ईडी को इस कार्यवाही में पक्षकार नहीं बनाया गया था। इस पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि ईडी “पक्षकार न बनाए जाने के कारण प्रभावित” हुई।

इसके बाद UEWPL के नए प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे वास्तविक गृहखरीदारों के हितों की रक्षा के लिए सहमति से समाधान निकालें।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ईडी ने गृहखरीदारों के विवरण की जांच की और संपत्तियों की बहाली के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) दाखिल किया।

10 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 8(8) के तहत वास्तविक गृहखरीदारों के हित में बहाल करने की अनुमति दी।

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा:

“हम ईडी और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के प्रयासों की सराहना करते हैं जिन्होंने निर्दोष गृहखरीदारों के हितों की रक्षा करते हुए संपत्तियों की बहाली सुनिश्चित की।”

शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल इस मामले के विशेष तथ्यों पर आधारित है और इसे भविष्य में नजीर (precedent) के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

इस फैसले के साथ 213 गृहखरीदारों की 12 साल लंबी प्रतीक्षा समाप्त हो गई है और UEWPL तथा ईडी के बीच 7 साल पुराना विवाद भी खत्म हो गया है।

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