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Thursday, January 15, 2026

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन में बदलने का किया आह्वान

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मंत्रालयों और विभागों से सरकार की चल रही स्वच्छता पहल को जन भागीदारी, नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी से जोड़ते हुए एक व्यापक जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।

स्पेशल कैम्पेन 5.0 की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में डॉ. सिंह ने कहा कि केवल प्रतीकात्मक प्रयासों से आगे बढ़ते हुए स्वच्छता, स्थान अनुकूलन और अभिलेख प्रबंधन को शासन के दैनिक कार्य का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हमें तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और निजी क्षेत्र के सहयोग को जोड़कर इस अभियान को वर्षभर सतत बनाए रखना चाहिए।”

मंत्री ने नासकॉम (NASSCOM) के माध्यम से कॉरपोरेट साझेदारी और एमएसएमई सहयोग का उपयोग कर शहरी क्षेत्रों, होटलों और सरकारी प्रतिष्ठानों में कचरा प्रबंधन के नवीन समाधान अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों और स्मार्ट रीसाइक्लिंग मॉडल जैसे ऑटोमेटेड वेस्ट सेग्रीगेशन और इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप मैनेजमेंट को मंत्रालयों और समाज के विभिन्न वर्गों में लागू कर संचालन कुशलता बढ़ाई जा सकती है और नए रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मंत्रालयों के बीच श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान पर जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थलों से लेकर शैक्षणिक परिसरों तक के सफल स्वच्छता मॉडल का दस्तावेजीकरण कर एक केंद्रीय भंडार (Central Repository) के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जाए। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक फाइल निपटान, कचरे के स्मार्ट पुन: उपयोग और सरकारी भूमि के पुनर्पयोग जैसी पहलों की पहचान कर नए सुशासन मानक स्थापित करने का सुझाव दिया।

मंत्री ने कहा कि युवा और महिलाओं की भागीदारी से इस अभियान में नई ऊर्जा और सृजनात्मकता का संचार होगा। उन्होंने कहा, “जब युवा और महिलाएँ इस आंदोलन से जुड़ती हैं तो यह अधिक प्रभावशाली बन जाता है।”

उन्होंने विद्यालयों, महाविद्यालयों और ‘माई भारत’ स्वयंसेवकों के माध्यम से स्वच्छता संदेशों को व्यापक रूप से प्रसारित करने का आग्रह किया ताकि सामूहिक जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित हो सके।

डॉ. सिंह ने कहा कि पूर्व के संस्करणों की सफलता से यह अभियान एक अल्पकालिक स्वच्छता अभियान से आगे बढ़कर परिवर्तनकारी सुशासन मॉडल बन गया है जो कुशलता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस गति को बनाए रखने के सरकार के संकल्प को दोहराया और कहा कि अभियान से उभरने वाली श्रेष्ठ नवाचार पहलें राज्यों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त निकायों के साथ साझा की जाएंगी।

बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भी अपने संबोधन में व्यवहार परिवर्तन और युवाओं की भागीदारी को “स्वच्छ भारत” के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र एवं युवा राजदूतों की नियुक्ति का सुझाव दिया जो समाज में स्वच्छता और स्वच्छ व्यवहार के प्रति जागरूकता फैलाएँ।

बैठक में वी. श्रीनिवास, सचिव, डीएआरपीजी; सरिता चौहान, संयुक्त सचिव, डीएआरपीजी; तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, और अन्य संबद्ध विभागों एवं भागीदार संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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