पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने आज कहा कि जम्मू, जिसे अतीत में केवल खोखले वादे मिले, अब मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के तहत समावेशी और सतत विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और राहत की सांस ले रहा है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि निर्वाचित सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता का विश्वास बहाल किया है और सत्ता के द्वार आम लोगों के लिए खोले हैं।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पार्टी अध्यक्ष को उन लंबे समय से लंबित जनसमस्याओं से अवगत कराया, जो उनके अनुसार पिछले एक दशक में भाजपा के कुशासन के कारण जमा हुईं। प्रतिनिधिमंडल ने पिछले दस वर्षों में जम्मू शहर को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ओमर अब्दुल्ला सरकार द्वारा उठाए गए सुधारात्मक और विकासात्मक कदमों की सराहना की।
संगठनात्मक और पार्टी मामलों पर चर्चा करते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस वर्षों के अलोकतांत्रिक शासन के दौरान जनता की कठिनाइयों और चुनौतियों से पूरी तरह अवगत है।
उन्होंने कहा, “ओमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बहाल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।”
स्मार्ट सिटी परियोजना का उल्लेख करते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ दिनों की बारिश और जलभराव ने इसके खोखले दावों की पोल खोल दी है।
सरकारी पहलों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उपेक्षित रहे ऐतिहासिक मुबारक मंडी विरासत परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए मुफ्त परिवहन सुविधा से उनकी आवाजाही बढ़ी है, अतिरिक्त राशन कोटा से गरीब परिवारों को राहत मिली है और दरबार मूव की बहाली से जम्मू के व्यापारियों के चेहरों पर मुस्कान लौटी है।
उन्होंने कहा कि रोपवे, रिवरफ्रंट विकास, जम्मू शहर में झील निर्माण सहित चल रही और प्रस्तावित परियोजनाएं जम्मू को देश के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करेंगी।
डॉ. अब्दुल्ला ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) और पंचायत चुनावों के लिए तैयार रहने और जनसंपर्क मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं, विशेषकर महिलाओं को विशेष प्रतिनिधित्व देने पर बल दिया।
इस बीच, मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को गुज्जर संस्थानों से गुज्जर-बकरवाल समुदाय पर जलवायु परिवर्तन और आरक्षण के प्रभाव पर वैज्ञानिक शोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अध्ययन भविष्य की प्रभावी नीतियां बनाने में सहायक होंगे।
मुख्यमंत्री गुरजर देश चैरिटेबल ट्रस्ट (जीडीसीटी), जम्मू में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जो बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. मसूद अहमद चौधरी की तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया था। उन्होंने डॉ. चौधरी को दूरदर्शी शिक्षाविद और संस्थान निर्माता बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुज्जर-बकरवाल समुदाय की घुमंतू जीवनशैली उन्हें जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। उन्होंने गुज्जर छात्रावासों, स्कूलों और मोबाइल स्कूलों को मजबूत करने तथा आरक्षण के वास्तविक प्रभाव का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कई मंत्री, विधायक, पूर्व मंत्री, वरिष्ठ अधिवक्ता, नागरिक समाज के सदस्य और गुज्जर समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


