जम्मू: बजट चर्चा के दौरान मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ, जब नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने अपने भाषण में सरकार के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनके भाषण के दौरान सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायकों ने कड़ा विरोध जताया, जिससे सदन कई बार बाधित हुआ।
सुनील शर्मा ने अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले का बचाव करते हुए उमर अब्दुल्ला सरकार की आलोचना की। उनके कुछ बयानों पर NC विधायकों ने आपत्ति जताई और नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर शर्मा ने विरोध कर रहे विधायकों को बैठने को कहा और चेतावनी दी कि वे हालिया राज्यसभा चुनावों में कथित “बैकडोर डील” का खुलासा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें पता है किसने क्या किया और किसके लिए किया, और उन्हें मजबूर न किया जाए कि वे सब कुछ सार्वजनिक करें। इस बयान के बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। खेल मंत्री सतीश शर्मा, विधायक नजीर गुरेजी और अन्य NC सदस्यों ने उनसे नाम बताने की मांग की। सतीश शर्मा ने आरोप लगाया कि LoP सदन को गुमराह कर रहे हैं और खुद चुनाव से पहले रातभर नंबर जुटाने में लगे थे।
स्थिति तब और बिगड़ी जब सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि सदन के एक सदस्य ने अमेरिकी संविधान से तुलना कर भारतीय संविधान को चुनौती दी। NC विधायकों ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया। भाजपा के कई विधायक भी LoP के समर्थन में खड़े हो गए और दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने स्पीकर से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर आरोप है और संबंधित सदस्य का नाम बताया जाना चाहिए। स्पीकर ने बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।
अपने भाषण में सुनील शर्मा ने सरकार पर चुनावी वादे पूरे न करने और केंद्र की योजनाओं का श्रेय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सवाल पूछने पर सरकार जिम्मेदारी केंद्र पर डाल देती है, लेकिन लाभ मिलने पर खुद श्रेय लेती है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में बड़े सकारात्मक बदलाव आए हैं, आतंक पीड़ित परिवारों को नौकरियां मिली हैं, और इसके लिए उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का धन्यवाद किया।
उन्होंने रोजगार और दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया।


