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Monday, March 2, 2026

माओवाद ने केवल विनाश फैलाया, 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि माओवाद ने किसी भी समाज को लाभ नहीं पहुंचाया और जहां भी रहा, वहां केवल विनाश फैलाया। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर में आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम “बस्तर पंडुम 2026” के समापन समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की और सम्मानजनक पुनर्वास का भरोसा दिया।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सली पुनर्वास नीति बेहद आकर्षक है। शाह ने चिंता जताई कि अभी भी सक्रिय नक्सलियों में कई युवा आदिवासी लड़कियां शामिल हैं, जिन्हें पुनर्वास के जरिए सुरक्षित भविष्य दिया जाना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग हिंसा, आईईडी विस्फोट, स्कूल और अस्पताल जलाने जैसी गतिविधियां जारी रखेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सशस्त्र हिंसा का जवाब सख्ती से दिया जाएगा। शाह ने कहा कि कोलंबिया, पेरू और कंबोडिया जैसे देशों में भी माओवादी हिंसा ने केवल तबाही लाई।

शाह ने कहा कि सरकार की लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि आदिवासी भाइयों-बहनों की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलियों ने दशकों तक स्कूल बंद कराए, जिससे व्यापक अशिक्षा फैली।

विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर अब तेज विकास के रास्ते पर है — स्कूल खुल रहे हैं, सड़कें बन रही हैं, मोबाइल टावर लग रहे हैं, डाकघर खुल रहे हैं तथा गांवों तक बिजली और पेयजल पहुंच रहा है। उन्होंने लक्ष्य रखा कि अगले पांच वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी बहुल संभाग बनेगा।

शाह ने सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र के लिए विकास रोडमैप बताते हुए कहा कि दिसंबर 2027 तक सभी गांवों में बिजली, हर गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी और हर पांच किलोमीटर पर बैंक या डाकघर की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने घोषणा की कि आदिवासी किसानों से धान 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा, घरों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे और हर घर नल से जल पहुंचाया जाएगा। नक्सल हिंसा घटने के साथ एडवेंचर टूरिज्म, होमस्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी पर्यटन योजनाएं भी विकसित की जा रही हैं।

बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया जा रहा है, जिससे आदिवासी युवाओं को रोजगार मिलेगा। इंद्रावती नदी पर नई सिंचाई परियोजनाएं शुरू होंगी, जिनसे दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में 2.75 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 120 मेगावाट बिजली भी उत्पन्न होगी।

गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर की पहचान बंदूक और विस्फोटक नहीं बल्कि उसकी संस्कृति और विरासत है। उन्होंने राज्य पुलिस, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ के प्रयासों की सराहना की और शहीद जवानों के परिवारों को नमन किया।

उन्होंने बस्तर पंडुम 2026 के सफल आयोजन की सराहना करते हुए बताया कि इस वर्ष कार्यक्रम का विस्तार 12 विधाओं तक किया गया है और हजारों पंचायतों की भागीदारी रही। प्रत्येक विधा के शीर्ष तीन विजेताओं को अपनी कला प्रस्तुत करने और भोजन के लिए राष्ट्रपति भवन आमंत्रित किया जाएगा।

शाह ने कहा कि यह उत्सव बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक है और सरकार इसे आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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