नगरोटा विधानसभा क्षेत्र में आज हुए उपचुनाव में 75.08 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सभी 150 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग सम्पन्न हुई।
बीजेपी की देव्यानी राणा, नेशनल कॉन्फ्रेंस की शमीम बेगम, जेकेएनपीपी-आई के हर्षदेव सिंह और निर्दलीय अनिल शर्मा सहित 10 उम्मीदवारों की किस्मत EVM में बंद हो गई है। मतगणना 14 नवम्बर को होगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) संजीव वर्मा ने डेली एक्सेलसियर से बातचीत में बताया कि उपचुनाव में “पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुचारु मतदान” हुआ। वर्मा ने दिनभर विभिन्न मतदान केंद्रों का दौरा किया और कहा कि मतदाता व्हीलचेयर, पानी और अन्य सुविधाओं से संतुष्ट दिखे।
अधिकारियों के अनुसार, एक-दो EVM मशीनों को तकनीकी खराबी के कारण बदलना पड़ा, लेकिन मतदान बिना किसी व्यवधान के जारी रहा।
पिछले साल से थोड़ा कम, फिर भी उत्साह बरकरार
2024 विधानसभा चुनाव में नागरोता ने 77.66% मतदान दर्ज किया था। इसके मुकाबले उपचुनाव में यह आंकड़ा काफी निकट रहा, जो मतदाताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी को दर्शाता है।
पिछली बार बीजेपी के देवेंद्र सिंह राणा ने 48,113 वोट हासिल किए थे, जबकि एनसी के जोगिंदर सिंह 17,641 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस उम्मीदवार को केवल 5,979 वोट मिले थे और बाकी उम्मीदवार तीन अंकों में ही सिमट गए थे। कुल 74,083 वोट पड़े थे।
इस बार भी मतदान की संख्या लगभग समान रही, जबकि मतदाताओं की कुल संख्या बढ़कर लगभग 98,000 हो गई थी।
कड़ी सुरक्षा, लगातार निगरानी
सभी मतदान केंद्रों और संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा बल, पुलिस और अर्धसैनिक जवान तैनात रहे।
निर्वाचन आयोग के प्रेक्षकों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने अनेक बूथों का दौरा किया।
शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के बाद EVMs को सुरक्षित रूप से स्ट्रॉन्ग रूम में जमा कर दिया गया, जहां 14 नवम्बर तक कड़ी निगरानी रहेगी।
पहली बार ऐप के माध्यम से टर्नआउट रिपोर्टिंग
पहली बार प्रिसाइडिंग अधिकारियों ने मतदान प्रतिशत सीधे ‘प्रिसाइडिंग ऑफिसर ऐप’ के माध्यम से अपलोड किया, जो ECI के Integrated ECTNet प्लेटफॉर्म का हिस्सा है। इससे आंकड़ों के संप्रेषण में देरी और त्रुटि दोनों में कमी आई।
उपचुनाव क्यों हुआ?
उपचुनाव बीजेपी के वरिष्ठ नेता और 2024 में विजयी रहे देवेंद्र सिंह राणा के आकस्मिक निधन के कारण आवश्यक हुआ।
बीजेपी ने इस बार उनकी बेटी देव्यानी राणा को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने “व्यावसायिक और समावेशी विकास” के मुद्दे पर प्रचार किया।
एनसी की शमीम बेगम, जो वर्तमान में DDC सदस्य हैं, ने अपने जमीनी जुड़ाव और संगठनात्मक मजबूती को हथियार बनाया।
पूर्व मंत्री हर्षदेव सिंह ने खुद को “दो बड़े दलों का विकल्प” बताकर चुनाव लड़ा, जबकि निर्दलीय अनिल शर्मा, पूर्व सरपंच, ने स्थानीय समर्थन और जनकल्याण के वादों पर अभियान चलाया।
मतदाताओं की राय
सुबह 9 बजे के बाद धूप निकलते ही बड़ी संख्या में मतदाता बूथों पर पहुंचने लगे।
कोल कंडोली बूथ पर मतदाताओं ने कहा कि वे “नागरोता क्षेत्र में विकास की निरंतरता बनाए रखने” के लिए मतदान कर रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
1996 के बाद से नागरोता सीट बीजेपी और एनसी के बीच अदल-बदल होती रही है —
बीजेपी ने 2002, 2008 और 2024, जबकि एनसी ने 1996 और 2014 में जीत दर्ज की।
कांग्रेस ने इस बार उम्मीदवार नहीं उतारा और एनसी के प्रचार में भी शामिल नहीं हुई, जबकि दोनों यूटी स्तर पर गठबंधन में हैं।
नागरोता और बडगाम उपचुनावों के परिणाम जम्मू-कश्मीर विधानसभा की दो रिक्त सीटों को भरेंगे। 90 सदस्यीय सदन में फिलहाल 88 विधायक हैं।
एक रिक्ति देवेंद्र सिंह राणा के निधन से और दूसरी पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला के बडगाम सीट से त्यागपत्र देने के कारण हुई, जिन्होंने पिछले वर्ष दो सीटों से जीतकर गांदरबल सीट को बरकरार रखा।


