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Monday, March 2, 2026

उच्च न्यायालयों में सीधे जमानत याचिका दायर करने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट ने तीन-न्यायाधीशों की पीठ को भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह महत्वपूर्ण प्रश्न तीन-न्यायाधीशों की पीठ को भेज दिया कि क्या आरोपी सीधे उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका दाखिल कर सकते हैं या उन्हें पहले सेशन कोर्ट जाना अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने कहा, “यह मामला तीन-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुना जाना आवश्यक है।” जैसे ही बड़ी पीठ का गठन होगा, मामला सूचीबद्ध किया जाएगा।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा को इस मामले में अमाइकस क्यूरी नियुक्त किया था।

केरल हाईकोर्ट की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को यह ध्यान में लाया था कि केरल हाईकोर्ट में एक “नियमित प्रथा” है जहाँ अग्रिम जमानत की याचिकाएँ सीधे स्वीकार की जाती हैं, बिना कि आरोपी पहले सेशन कोर्ट जाए।

पीठ ने सवाल किया था, “केवल केरल हाईकोर्ट में ही ऐसा क्यों हो रहा है? कहीं और ऐसा नहीं देखा गया।”

अदालत ने पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और नई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 का हवाला देते हुए कहा था कि जमानत आवेदनों के लिए एक स्पष्ट न्यायिक पदानुक्रम निर्धारित है। BNSS की धारा 482 गिरफ्तारी की आशंका वाले व्यक्ति को जमानत देने के निर्देशों से संबंधित है।

जिस मामले से विवाद उठा

यह अवलोकन दो याचिकाकर्ताओं की उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें उन्होंने केरल हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत को खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी। दोनों ने पहले सेशन कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाए बिना सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

अदालत ने कहा कि इस तरह की प्रथा से सत्र न्यायालय के समक्ष आने वाले कई महत्वपूर्ण तथ्य उच्च न्यायालय में पेश नहीं हो पाते।

पीठ ने कहा, “हम यह तय करना चाहते हैं कि क्या आरोपी के पास उच्च न्यायालय जाने का विकल्प है या सेशन कोर्ट जाना अनिवार्य होना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर केरल हाईकोर्ट (रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से) को नोटिस भी जारी किया था।

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