16.1 C
Jammu
Thursday, January 15, 2026

धार्मिक श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया विश्वकर्मा दिवस

जम्मू में आज विश्वकर्मा दिवस बड़े ही धार्मिक उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। तकनीकी कर्मियों, कारीगरों तथा औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों ने भगवान विश्वकर्मा — सृष्टि के दिव्य शिल्पकार — की पूजा-अर्चना कर उनसे सुरक्षा, समृद्धि और कार्य में सफलता का आशीर्वाद मांगा।

परंपरा के अनुसार, इस दिन सभी तकनीकी कर्मियों ने कार्य नहीं किया और अपने औजारों तथा मशीनों की सफाई व सेवा करने के बाद उनकी पूजा की। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं से रक्षा होती है और संस्थानों के मुनाफ़े में भी वृद्धि होती है। विश्वकर्मा दिवस दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है।

विश्वकर्मा सभा मंदिर परिसर, बक्शी नगर, जम्मू में आज के समारोह की शुरुआत हवन और विशेष पूजा के साथ हुई। कार्यक्रम का आयोजन विश्वकर्मा सभा की ओर से किया गया था, जिसमें अनेक गणमान्य अतिथियों ने शिरकत की। इनमें सांसद जुगल किशोर शर्मा, विधायक जम्मू पश्चिम अरविंद गुप्ता, जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री सत शर्मा (सीए), पूर्व उपाध्यक्ष (ओबीसी) कुलदीप राज वर्मा, पूर्व पार्षद गौरव चोपड़ा, सुरिंदर सिंह चौधरी, मनमोहन सिंह, प्रादेशिक विश्वकर्मा सभा के अध्यक्ष शशि वर्मा और टीम जम्मू के चेयरमैन जोरावर सिंह जमवाल प्रमुख थे।

अतिथियों ने भगवान विश्वकर्मा के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें “दिव्य अभियंता” और “शिल्प के देवता” बताया। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा हर उस व्यक्ति के प्रेरणास्रोत हैं जो निर्माण, सृजन या अभियांत्रिकी से जुड़ा हुआ है। वक्ताओं ने तकनीकी वर्ग के कर्मियों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका की सराहना की और विश्वकर्मा समाज की एकता एवं उत्थान की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन कुलजीत राय (चेयरमैन, विश्वकर्मा सभा), विजय कुमार (उपाध्यक्ष), रत्तन लाल चंगोत्रा, अशोक कुमार, ओम प्रकाश, संजय कुमार आदि के सहयोग से किया गया।

वहीं, विश्वकर्मा मंदिर, न्यू प्लॉट्स, जम्मू में भी हवन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता मोहिंदर लाल (मंदिर समिति अध्यक्ष) ने की।

इस अवसर पर बोलते हुए मोहिंदर लाल ने विश्वकर्मा दिवस को राजपत्रित अवकाश घोषित करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि “हर श्रमिक इस दिन अव्यक्त अवकाश मनाता है, इसलिए सरकार को इसे आधिकारिक अवकाश घोषित करना चाहिए।” रमेश अंगोत्रा ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को इस दिन के सांस्कृतिक एवं औद्योगिक महत्व को मान्यता देनी चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में भक्तों के लिए लंगर का आयोजन किया गया। आयोजन समिति में रत्तन लाल, जोगिंदर अंगोत्रा, पप्पू विर्धी, विशाल अंगोत्रा, कुनाल अंगोत्रा और जितेंद्र जाजुआ शामिल थे।

Related Articles

- Advertisement -spot_img

Latest Articles