नई दिल्ली: तिरुपति मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि CBI ने इस मामले की जांच में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस बी.आर. गवई की बेंच ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान CJI गवई ने कहा, ‘अगर SIT किसी विशेष अधिकारी को जांच के लिए नियुक्त करना चाहती है, तो इसमें क्या गलत है?’ कोर्ट ने यह भी साफ किया कि विशेष जांच दल (SIT) के सदस्यों पर कोई शक नहीं है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि CBI डायरेक्टर ने तिरुपति लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी की जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 2024 के निर्देशों का पालन नहीं किया। हाई कोर्ट का कहना था कि CBI निदेशक ने जे. वेंकट राव नामक अधिकारी को जांच सौंप दी, जो SIT का हिस्सा नहीं थे। हाई कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन माना था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CBI की ओर से दलील दी कि हाई कोर्ट का यह निष्कर्ष गलत है कि जांच में शामिल अधिकारी को SIT के सदस्य के रूप में आधिकारिक तौर पर नामित नहीं किया गया था। मेहता ने कहा कि CBI ने जांच में कोई गलती नहीं की।
CBI को दिया जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अपना जवाब दाखिल करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या SIT ने अपना काम बंद कर दिया है? CJI ने सवाल किया, ‘क्या कुछ काम किसी और अधिकारी को सौंपा नहीं जा सकता?’ कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि SIT के कामकाज पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है। तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में भगवान को चढ़ाए जाने वाले प्रसादम लड्डू में मिलावटी घी के इस्तेमाल का आरोप लगा था। इस मामले ने देश भर में हंगामा मचा दिया था, क्योंकि तिरुपति का लड्डू लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है।


