जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मेहराज मलिक की जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत की गई नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
मेहराज मलिक, जो आम आदमी पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष भी हैं, को कथित रूप से सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने के आरोप में 8 सितंबर पिछले वर्ष हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें कठुआ जेल में रखा गया।
24 सितंबर को मलिक ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर कर अपनी नजरबंदी को चुनौती दी और 5 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की एकल पीठ ने की। अधिवक्ता अप्पू सिंह सलाथिया ने बताया कि अदालत ने मामले को आदेश सुनाने के लिए सुरक्षित रख लिया है।
सलाथिया, जो आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता भी हैं, ने कहा कि अदालत ने मेहराज मलिक की कानूनी टीम और राज्य सरकार दोनों को एक सप्ताह का समय दिया है, ताकि वे यदि चाहें तो लिखित पक्ष या अतिरिक्त प्रस्तुतियां दाखिल कर सकें।
उन्होंने इसे लंबी और चुनौतीपूर्ण कानूनी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। साथ ही उन्होंने मलिक के समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से शांत और सकारात्मक बने रहने की अपील की।

