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चिनाब रेल पुल: अनिश्चितता से इंजीनियरिंग की ऐतिहासिक विजय तक 20 साल का सफर

**EDS, FEB. 16, 2025 PIC** Reasi: An aerial view of the under-construction Chenab Bridge, in Reasi district, Sunday, Feb. 16, 2025. (Manish Deo via PTI Photo) (PTI06_06_2025_000369A)

जम्मू-कश्मीर: कभी कानूनी और पर्यावरणीय अड़चनों के कारण अधर में लटका विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे आर्च पुल अब भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक बनकर खड़ा है। Chenab Rail Bridge को 6 जून 2025 को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया गया, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कटरा से श्रीनगर के बीच Vande Bharat Express को हरी झंडी दिखाई।

यह पुल नदी तल से 359 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और Eiffel Tower से भी 35 मीटर ऊँचा है। 1,315 मीटर लंबा यह स्टील आर्च पुल 272 किलोमीटर लंबे Udhampur-Srinagar-Baramulla Rail Link (यूएसबीआरएल) परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से रेल मार्ग द्वारा जोड़ना है।

2008 में आया था संकट

साल 2008 में पर्यावरणीय चुनौतियों और कानूनी विवादों के चलते परियोजना पर संकट के बादल मंडरा गए थे। मामला Supreme Court of India तक पहुंचा और परियोजना 90 दिनों से अधिक समय तक स्थगित रही। उस समय रेलवे बोर्ड ने वैकल्पिक मार्ग, यहां तक कि आर्च पुल की जगह सुरंग बनाने पर भी विचार किया।

इसी दौरान Afcons Infrastructure Limited को अनुबंध से बाहर निकलने का विकल्प दिया गया। लेकिन कंपनी ने वित्तीय जोखिम के बावजूद परियोजना जारी रखने का फैसला किया।

कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने बताया कि उस समय के चेयरमैन Cyrus Mistry के साथ लंबी चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि परियोजना को अधूरा छोड़ना देश और कंपनी दोनों के लिए नुकसानदायक होगा। उन्होंने कहा, “जहां सभी को यह असंभव लग रहा था, हमने इसे संभव कर दिखाने का संकल्प लिया।”

तकनीकी चुनौतियां और बदलाव

परियोजना की मूल परिकल्पना में आर्च पुल ही शामिल था, लेकिन निर्माण के दौरान कई तकनीकी बदलाव किए गए। सुरक्षा कारणों से ‘ब्लास्ट लोड’ जैसी अतिरिक्त आवश्यकताएं जोड़ी गईं। इतनी ऊँचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में इस स्तर का पुल पहले कभी भारत में नहीं बना था, जिससे हर चरण चुनौतीपूर्ण रहा।

करीब दो दशकों के लंबे सफर — 2004 में अनुबंध से लेकर 2025 में उद्घाटन तक — के बाद यह पुल अब देश की इंजीनियरिंग क्षमता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बन गया है।

अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएं

अफकॉन्स ने कोलकाता में हुगली नदी के नीचे देश की पहली अंडरवॉटर मेट्रो सुरंग का निर्माण भी किया है। वर्तमान में कंपनी महाराष्ट्र के ठाणे में मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए समुद्र के नीचे सुरंग निर्माण कार्य में लगी हुई है।

चिनाब रेल पुल के संचालन के साथ ही कश्मीर को रेल मार्ग से देश के शेष हिस्सों से जोड़ने का सपना साकार हो गया है, जो न केवल क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगा बल्कि भारत की वैश्विक इंजीनियरिंग पहचान को भी नई ऊंचाई देगा।

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