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Monday, March 2, 2026

नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री डिक स्कूफ भारत पहुंचे, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में लेंगे भाग

नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री डिक स्कूफ बुधवार को भारत पहुंचे, जहां वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर दुनिया भर के नेताओं को एक मंच पर ला रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली पहुंचने पर उनका स्वागत केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया।

विदेश मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री स्कूफ की भागीदारी भारत और नीदरलैंड्स के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा व मजबूत करेगी।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन भारत मंडपम, नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक किया जा रहा है। इस सम्मेलन में विश्व भर से सरकारी नीति-निर्माता, उद्योग जगत के एआई विशेषज्ञ, शिक्षाविद, तकनीकी नवोन्मेषक और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, ताकि एआई के शासन, सुरक्षा और सामाजिक प्रभाव पर वैश्विक विमर्श को आगे बढ़ाया जा सके।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के इतर कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्ज़ांडर वुचिच, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो और स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ से मुलाकात की।

इसके अलावा सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और स्वीडन की उपप्रधानमंत्री एवं ऊर्जा, व्यापार और उद्योग मंत्री एब्बा बुश भी एआई समिट में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं।

ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला यह पहला वैश्विक एआई सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की राष्ट्रीय भावना और “एआई फॉर ह्यूमैनिटी” के वैश्विक सिद्धांत के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता पर विचार करना है।

इस सम्मेलन में 110 से अधिक देशों और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी हो रही है, जिनमें लगभग 20 राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष स्तर के प्रतिनिधि और करीब 45 मंत्री शामिल हैं।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 तीन मूल स्तंभों—पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस—पर आधारित है, जिनका उद्देश्य मानव-केंद्रित एआई को बढ़ावा देना, पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ तकनीकी विकास सुनिश्चित करना और समावेशी आर्थिक प्रगति को प्रोत्साहित करना है।

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