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Monday, March 2, 2026

2023 से 2025 के बीच मानव-वन्यजीव संघर्ष के 15,661 मामले दर्ज, 32 की मौत; जम्मू जिला सबसे अधिक प्रभावित

जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2023 से 2025 के बीच मानव-वन्यजीव संघर्ष के कुल 15,661 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 32 लोगों की मृत्यु हुई और 350 लोग घायल हुए। जम्मू जिला अकेले लगभग 18 प्रतिशत मामलों के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहा।

यह जानकारी वन मंत्री Javed Rana ने मंगलवार को विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक Mubarak Gul के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

2023-24 में 9,301 मामले

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023-24 में 9,301 मामले दर्ज हुए, जिनमें 137 लोग घायल हुए और 18 की मृत्यु हुई।

जिला-वार आंकड़ों के अनुसार जम्मू में सर्वाधिक 1,444 मामले दर्ज हुए। इसके बाद कुपवाड़ा (1,173), किश्तवाड़ (998), बारामूला (950), डोडा (826) और रामबन (756) का स्थान रहा। वर्ष के दौरान कुपवाड़ा में चार मौतें दर्ज की गईं, जबकि डोडा और अनंतनाग में तीन-तीन लोगों की जान गई।

2024-25 में अब तक 6,360 मामले

वर्ष 2024-25 में अब तक 6,360 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 213 लोग घायल हुए और 14 की मृत्यु हुई।

इस अवधि में भी जम्मू जिला 1,341 मामलों के साथ शीर्ष पर रहा। इसके बाद रामबन (686), किश्तवाड़ (673), अनंतनाग (637) और डोडा (609) का स्थान रहा। वर्तमान वित्तीय वर्ष में पुलवामा में 30 लोग घायल हुए, जबकि अनंतनाग में सर्वाधिक 34 चोटें दर्ज की गईं।

मौतों के मामले में 2024-25 के दौरान डोडा और कुपवाड़ा में तीन-तीन तथा अनंतनाग में दो मौतें दर्ज की गईं।

आयु वर्ग और रोकथाम के उपाय

मंत्री ने सदन को बताया कि जम्मू क्षेत्र में प्रभावित व्यक्तियों की आयु 15 से 60 वर्ष के बीच है, जबकि कश्मीर क्षेत्र में यह 4 से 70 वर्ष तक है।

सरकार ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों को विकास योजनाओं में शामिल किया जा रहा है, ताकि दीर्घकालिक सह-अस्तित्व सुनिश्चित किया जा सके।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है।

42 नियंत्रण कक्ष स्थापित

रोकथाम उपायों के तहत पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 42 नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं, जो वन्यजीव आपात स्थितियों में चौबीसों घंटे प्रतिक्रिया सुनिश्चित करते हैं। इन नियंत्रण कक्षों में बेहोशी की बंदूकें, दवाइयां, पकड़ने के जाल, पिंजरे, बचाव उपकरण और वाहन उपलब्ध हैं तथा प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई है।

इसके अलावा चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में नियमित गश्त, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती की जा रही है। आवश्यक स्थानों पर चेतावनी संकेतक बोर्ड और अन्य निवारक उपाय भी लगाए जा रहे हैं।

मंत्री ने बताया कि दीर्घकालिक हस्तक्षेप के तहत संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक जोन निर्धारण, आवास सुधार और वन्यजीव गलियारों के संरक्षण पर भी कार्य किया जा रहा है।

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि मुआवजा वितरण के कई मामले लंबित हैं, जिनमें कुपवाड़ा (46), अनंतनाग (41) और बारामूला (28) में सबसे अधिक मामले लंबित हैं।

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