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Monday, March 2, 2026

जेके और लद्दाख हाईकोर्ट ने भूमि बंटवारे मामले में सहमति आधारित आदेश को बरकरार रखा, अंतरिम यथास्थिति हटाई

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने भूमि बंटवारे से जुड़े एक मामले में पुनरीक्षण प्राधिकरण के आदेश को बरकरार रखते हुए राजस्व अधिकारियों को नियमों के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है तथा वर्षों से लागू अंतरिम यथास्थिति आदेश को निरस्त कर दिया है।

यह निर्णय Justice Wasim Sadiq Nargal द्वारा सिकंदर शर्मा की याचिका पर सुनाया गया। याचिका में 6 जनवरी 2021 को अतिरिक्त आयुक्त, जम्मू (पुनरीक्षण प्राधिकरण) द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। उक्त आदेश में अधीनस्थ प्राधिकरण को सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद बंटवारे की कार्यवाही पुनः शुरू करने का निर्देश दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा कि पुनरीक्षण प्राधिकरण का आदेश सभी पक्षों के अधिवक्ताओं की सहमति से पारित हुआ था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ता अपने मुवक्किलों के अधिकृत प्रतिनिधि होते हैं और एक बार न्यायिक कार्यवाही में सहमति दर्ज हो जाने के बाद, सामान्यतः पक्षकार बाद में उस आदेश को चुनौती नहीं दे सकते, जब तक कि धोखाधड़ी, दबाव या अधिकार क्षेत्र की स्पष्ट त्रुटि सिद्ध न हो।

न्यायालय ने कहा कि सहमति आधारित आदेश विवादों को अंतिम रूप देने और अनावश्यक लंबित मुकदमों से बचने के उद्देश्य से पारित किए जाते हैं। याचिकाकर्ता केवल इस आधार पर अपनी पूर्व सहमति से पीछे नहीं हट सकता कि परिणाम उसके पक्ष में नहीं रहा।

याचिकाकर्ता के इस तर्क को भी न्यायालय ने खारिज कर दिया कि आदेश कानून के विरुद्ध है। अदालत ने कहा कि पुनरीक्षण प्राधिकरण ने किसी अधिकार का अंतिम निर्धारण नहीं किया, बल्कि सक्षम प्राधिकारी को संबंधित बंटवारा नियमों के तहत सभी पक्षों को सुनकर निर्णय लेने को कहा है। इससे किसी पक्ष को कोई हानि नहीं होती, बल्कि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित होती है।

उच्च न्यायालय ने 1 फरवरी 2021 को पारित अंतरिम यथास्थिति आदेश को भी निरस्त करते हुए कहा कि इसकी निरंतरता न्यायहित में नहीं थी, क्योंकि इससे राजस्व अधिकारियों को कार्यवाही आगे बढ़ाने से रोका जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए अदालत ने दोहराया कि समझौता या सहमति आधारित आदेश ‘एस्टॉपल’ उत्पन्न करते हैं और अनंत मुकदमेबाजी को रोकने के लिए होते हैं। अदालत ने पाया कि पुनरीक्षण प्राधिकरण के आदेश में कोई अवैधता या अधिकार क्षेत्र की त्रुटि नहीं है और 6 जनवरी 2021 के आदेश को बरकरार रखते हुए मामले को संबंधित प्राधिकारी को नियमों के अनुसार आगे की कार्यवाही हेतु भेज दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर.के.एस. ठाकुर उपस्थित हुए, जबकि प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता प्रियंका भट (सीनियर एएजी मोनिका कोहली के स्थान पर) और अधिवक्ता अजय अबरोल पेश हुए।

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