दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी समन को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते, क्योंकि समन का पालन न करने से जुड़े आपराधिक मामलों में ट्रायल कोर्ट पहले ही उन्हें बरी कर चुका है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक बिंदु उचित समय पर उठाए जाएंगे।
ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि एजेंसी ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए सभी कानूनी मुद्दे भविष्य के लिए खुले रहेंगे।
गौरतलब है कि 22 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने समन के बावजूद पेश न होने से जुड़े दो मामलों में केजरीवाल को बरी कर दिया था। अदालत ने माना था कि समन की विधिवत सेवा को चुनौती देना कानूनी रूप से स्वीकार्य है और ED यह साबित नहीं कर सकी कि समन की जानबूझकर अवहेलना की गई।
केजरीवाल ने नौवें समन के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। बाद में ED ने उन्हें गिरफ्तार भी किया। फिलहाल वह मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत पर हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के तहत गिरफ्तारी की “आवश्यकता और औचित्य” के सवाल को बड़ी पीठ के पास भेज रखा है।
ED का आरोप है कि रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण में अन्य आरोपियों के साथ मिलकर केजरीवाल ने भूमिका निभाई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ और AAP को कथित रूप से किकबैक मिला। याचिका में केजरीवाल ने PMLA की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी थी और एजेंसी पर राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप लगाए थे।


