जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सत शर्मा ने सोमवार को उच्च सदन में जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो महत्वपूर्ण जनहित मुद्दे उठाए। उन्होंने शहरी गरीबों के लिए आवास सुरक्षा और आयकर से जुड़े वास्तविक कठिनाई मामलों में राहत की मांग की।
राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान मुद्दा उठाते हुए शर्मा ने जम्मू-कश्मीर में बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्थिति पर चिंता जताई और विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंदों के लिए पक्के मकानों के निर्माण पर जोर दिया।
उन्होंने सदन को बताया कि पूरे जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में केवल दो आश्रय गृह संचालित हैं, जो बेघर आबादी की जरूरतों की तुलना में बेहद कम हैं। उन्होंने आश्रय गृहों की संख्या बढ़ाने और कमजोर वर्गों के लिए आवासीय ढांचे को मजबूत करने की मांग की।
आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में जम्मू-कश्मीर में 19,375 मकान बनाए गए हैं, लेकिन निर्माण की गति तेज करने की जरूरत है ताकि गरीब, बेघर और भूमिहीन परिवारों को समय पर राहत मिल सके। उन्होंने संबंधित केंद्रीय मंत्री से आवास योजनाओं का विस्तृत विवरण देने और क्रियान्वयन में तेजी लाने का आग्रह किया।
आवास के अलावा उन्होंने आयकर कानून में हालिया संशोधन से उत्पन्न समस्याओं का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने बताया कि वित्त (संख्या–2) अधिनियम 2024 के तहत 1 अप्रैल 2025 से TDS सुधार विवरण दाखिल करने की समय सीमा छह वर्ष निर्धारित कर दी गई है। इससे करदाताओं और TDS से जुड़े पक्षों को कठिनाई हो रही है, विशेषकर 2018–19 से पहले के वित्तीय वर्षों के मामलों में, जहां सुधार की समय सीमा समाप्त हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक त्रुटियाँ जैसे गलत PAN या चालान मिलान की गलती अब सुधारी नहीं जा सकती, जिसके कारण Form 26AS में TDS क्रेडिट नहीं मिल रहा, कर मांग बढ़ रही है, रिफंड में देरी, ब्याज और जुर्माना लग रहा है तथा अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ रही है, जबकि कर पहले ही जमा किया जा चुका है।
सत शर्मा ने केंद्र सरकार से एकमुश्त राहत या विशेष कंडोनेशन विंडो देने तथा आयकर अधिनियम की धारा 119 के तहत उपयुक्त दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।

