Site icon AR24 Digital

राज्यसभा में रेल परियोजनाओं पर चर्चा: जम्मू मेट्रो पर विचार, भूमि व पर्यावरणीय अड़चनों से कई प्रोजेक्ट प्रभावित — अश्विनी वैष्णव

राज्यसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जम्मू में संभावित मेट्रो सेवा, भूमि और पर्यावरणीय अड़चनों के कारण रुकी परियोजनाओं, प्रीमियम ट्रेन कनेक्टिविटी की मांग और केरल में चल रही रेल पहलों पर सरकार का पक्ष रखा।

प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी के मनोनीत सांसद गुलाम अली ने जम्मू में मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना पर सवाल उठाया। इसके जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि वह यह प्रश्न मेट्रो मामलों को देख रहे मंत्री मनोहर लाल खट्टर को भेजेंगे, लेकिन उन्होंने माना कि जम्मू-कश्मीर जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रेल संचालन विशेष चुनौतियों से जुड़ा है।

उन्होंने कहा, “उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रेल संचालन जटिल है। जम्मू-कश्मीर के लिए ट्रेनों का विशेष डिजाइन होना चाहिए। डिजाइन तैयार है और इस पर निर्णय लिया जाना बाकी है,” जिससे क्षेत्र के लिए विशेष रेल प्रणाली विकसित करने की दिशा में प्रगति का संकेत मिला।

रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य रेल लाइन से शाखाएं (स्पर लाइन) नहीं बिछाई जाएंगी क्योंकि इससे सेब के बागानों पर प्रतिकूल असर पड़ता है और किसानों ने इस पर चिंता जताई है।

शून्यकाल के दौरान वैष्णव ने बताया कि कई रेल परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के कारण अटकी हुई हैं। उन्होंने केरल की सिल्वर लाइन सेमी-हाई-स्पीड रेल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका पर्यावरणीय प्रभाव काफी बड़ा है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण बड़ी चुनौती है और कई परियोजनाएं इसी वजह से लंबित हैं, इसलिए राज्य सरकारों को केंद्र के साथ बेहतर सहयोग करना चाहिए।

महाराष्ट्र से बीजेपी सांसद डॉ. मेधा विश्वराम कुलकर्णी ने दिल्ली-पुणे मार्ग पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग दिल्ली से पुणे काम के सिलसिले में यात्रा करते हैं, इसलिए इस रूट पर प्रीमियम ट्रेन सुविधा दी जानी चाहिए।

केरल की अंगमाली-सबरिमाला रेल परियोजना, जो भूमि अधिग्रहण विवादों के कारण लंबे समय से रुकी है, पर टिप्पणी करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि केरल में बीजेपी की सरकार आने पर इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। उनके इस बयान ने विपक्ष-शासित राज्यों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर राजनीतिक बहस को भी हवा दी।

Exit mobile version