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शिवराज पाटिल का लातूर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

शिवराज पाटिल का अंतिम संस्कार लातूर में राजकीय सम्मान के साथ

Latur: Former union home minister Shivraj Patil's son Shailesh Patil during a tribute ceremony, a day after the former passed away, at their residence in Latur, Maharashtra, Saturday, Dec. 13, 2025. (PTI Photo)(PTI12_13_2025_000009B)

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का अंतिम संस्कार शनिवार को उनके गृह जिले लातूर में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे और उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित की।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और कर्नाटक मंत्री ईश्वर खंड्रे जैसे प्रमुख नेता अंतिम संस्कार में शामिल हुए। उनका निधन देश के लिए एक गहरा क्षति है।

लिंगायत समुदाय के प्रमुख नेता रहे शिवराज पाटिल को लातूर से लगभग छः किलोमीटर दूर वरवंटी गांव में, लिंगायत परंपरा के अनुसार समाधि दी गई। उन्हें ध्यान मुद्रा में दफनाया गया, जो कि लिंगायत मान्यता के अनुसार, आत्मा का शिव से एकाकार होना दर्शाता है। इस परंपरा में दाह संस्कार की आवश्यकता नहीं होती।

अंतिम संस्कार से पूर्व, उन्होंने गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त किया और बंदूक सलामी दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और लातूर के सांसद शिवाजी कोलगे भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

शिवराज पाटिल का 90 वर्षीय जीवन और उनके राजनीतिक सफर ने भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ राष्ट्रीय महत्व रखता है।

शिवराज पाटिल का निधन शुक्रवार को लातूर में स्वास्थ्य समस्या के कारण हुआ। उनका राजनीतिक सफर पाँच दशकों से अधिक समय तक फैला, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने 1967 में लातूर नगर निगम के सदस्य के रूप में अपना राजनीतिक जीवन आरंभ किया।

इसके बाद, उन्होंने 1980 से 1999 तक लगातार सात बार लातूर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। पाटिल को 1980 में इंदिरा गांधी सरकार में रक्षा राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद वह कई अन्य मंत्रालयों का नेतृत्व कर चुके थे, जैसे कि वाणिज्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स।

राजीव गांधी सरकार के दौरान, उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। 2004 में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया, लेकिन 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 2010 से 2015 तक, उन्होंने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में भी सेवाएँ दीं।

शिवराज पाटिल की निष्ठा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें विशेष बनाती है। मार्च 1979 में, जब जयप्रकाश नारायण के निधन की अपुष्ट खबर आई, उन्होंने सदन की स्थगन का निर्णय लिया और आधिकारिक पुष्टि पर जोर दिया। यह घटना उनकी जिम्मेदारियों का परिचायक था।

शिवराज पाटिल का निधन भारतीय राजनीति के एक गरिमापूर्ण अध्याय का अंत है। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

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