सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पत्रकार महेश लंगा की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से तीन दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा। लंगा पर कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई चल रही है। न्यायालय ने लंगा के वकील से कहा कि ED के जवाब मिलने के बाद वे दो दिनों के भीतर प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) पेश करें। अगली सुनवाई 15 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान लंगा के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से मामले की गंभीरता पर चर्चा की। सिब्बल ने न्यायालय को बताया कि लंगा छह मामलों का सामना कर रहे हैं, जिनमें गंभीर आरोप शामिल हैं।
ED के वकील ने कोर्ट में कहा, “लंगा पर वसूली (extortion) का आरोप है।” उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अनुपस्थिति के कारण थोड़ी देरी की आवश्यकता बताई। इस पर पीठ ने ED को जल्दी जवाब देने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 8 सितंबर को गुजरात सरकार और ED को नोटिस जारी किया था। सितंबर की सुनवाई में, पीठ ने एक विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा: “किस तरह का पत्रकार है वह?” यह प्रतिक्रिया लंगा की पत्रकारिता की आचार संहिता और उसके कामकाज के तरीके पर सवाल खड़ा करती है। PE
सिब्बल ने न्यायालय को बताया कि सभी आरोप अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं और लंगा को पहले भी कई मामलों में अग्रिम जमानत मिल चुकी है। हालांकि, अब तीसरी FIR में ED ने लंगा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे उनकी स्थिति जटिल होती जा रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
- गुजरात हाई कोर्ट ने 31 जुलाई को लंगा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
- ED ने उन्हें 25 फरवरी को वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित केस में गिरफ्तार किया था।
- लंगा को पहली बार अक्टूबर 2024 में GST धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था।
- मनी लॉन्ड्रिंग की यह कार्रवाई अहमदाबाद पुलिस द्वारा दर्ज दो FIRs से उत्पन्न हुई है, जिनमें धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और आपराधिक दुरुपयोग के गंभीर आरोप हैं।
सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले, लंगा न्यायिक हिरासत में रहेंगे। यह मामला उन पत्रकारों की स्थिति और उनके कार्यों पर गंभीर प्रश्न उठाता है, जो जमानत पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

