हरियाणा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में भारत ने नेपाल को तीनों मैच जीतकर 3–0 से क्लीन स्विपकरते हुए खिताब अपने नाम किया। इस शानदार विजय में जम्मू–कश्मीर के रियासी जिले के खिलाड़ी नदीम भट्ट ने वह कमालकर दिखाया जिसकी चर्चा आज हर तरफ हो रही है।
भारत की जीत का असली हीरो रहे रियासी के 57 वर्षीय नदीम भट्ट, जिन्हें सीरीज़ में दो बार मैन ऑफ द मैच चुना गया।फाइनल मुकाबले में उन्होंने सिर्फ 16 रन देकर 4 विकेट झटके और भारत को जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
जहाँ लोग आमतौर पर इस उम्र तक पहुँचते–पहुँचते मैदान से दूर हो जाते हैं, वहीं नदीम भट्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकरसभी को चौंका दिया। उनकी फिटनेस, जुनून और खेल के प्रति समर्पण ने पूरे भारत के दिव्यांग क्रिकेट इतिहास में एक नईमिसाल कायम की है।
घर वापसी पर रियासी में खिलाड़ियों, स्थानीय लोगों और युवा क्रिकेटर्स ने नदीम भट्ट का गर्मजोशी से स्वागत किया। लोगों नेकहा आज रियासी का यह पल हमारे लिए गर्व का क्षण है। जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट लेते हैं उस उम्र में नदीम भट्ट नेअंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर देश और जम्मू–कश्मीर का नाम रोशन किया है।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि मैं जम्मू–कश्मीर का इकलौता खिलाड़ी हूँ जिसेभारत की दिव्यांग टीम के लिए चुना गया। मां वैष्णो देवी के आशीर्वाद से हमने नेपाल को हराकर शानदार जीत दर्ज की उन्होंनेआगे कहा मैं 57 साल की उम्र में खेल रहा हूँ ताकि युवाओं को प्रेरणा मिले। रियासी खेल मैदान मेरी माँ जैसा है वहीं से हमनेसब कुछ सीखा अब मेरी ख्वाहिश है कि मैं और बच्चों को क्रिकेट सिखाऊँ और आने वाले समय में रियासी के और खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचें।

