भारत और रूस ने गुरुवार को अपने सामरिक रक्षा सहयोग को और मजबूती प्रदान करने का निर्णय लिया। भारत ने S-400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त खेप खरीदने में गहरी रुचि जताई, ताकि देश की वायु रक्षा क्षमता में सुधार हो सके। यह महत्वपूर्ण बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोउसव के बीच आयोजित हुई, जो 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले हुई।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रात नई दिल्ली पहुँचे और वे शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्ता करेंगे। यह वार्ता भारत-रूस रक्षा सहयोग को नई दिशा देने में सहायक होगी।
बैठक में भारत ने रूस को बताया कि S-400 सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम के ऑपरेशन सिंदूर में उत्कृष्ट प्रदर्शन ने इसकी अतिरिक्त खरीद की आवश्यकता को बढ़ाया है। इस संदर्भ में, भारत और अतिरिक्त एस-400 इकाइयाँ खरीदने पर विचार कर रहा है।
भारत ने 2018 में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के समझौते के तहत पाँच S-400 यूनिट खरीदने का निर्णय लिया था, जिसके चलते अमेरिका ने CAATSA के तहत प्रतिबंधों की चेतावनी दी थी। इनमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही भारत को मिल चुके हैं, जबकि S-500 मिसाइल सिस्टम की संभावनाएँ भी तलाश की जा रही हैं।
रूस ने भारत को Su-57 पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी पेश किए हैं क्योंकि भारत उन्नत लड़ाकू जेट्स की खोज में है।
राजनाथ सिंह ने बैठक में यह स्पष्ट किया कि भारत स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने के प्रति प्रतिबद्ध है, ताकि घरेलू आवश्यकताएँ और निर्यात दोनों का ध्यान रखा जा सके। उन्होंने भारत–रूस सहयोग में नवाचार तकनीकों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
दोनों पक्षों ने पुष्टि की कि भारत–रूस संबंध गहरे विश्वास, साझा मूल्य और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं। बेलोउसव ने कहा कि रूस की रक्षा उद्योग भारत को आत्मनिर्भर बनने में पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वर्ष 2000 में रणनीतिक साझेदारी समझौते के बाद से भारत–रूस रक्षा सहयोग लगातार बढ़ता रहा है। राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद हमारा रक्षा सहयोग स्वस्थ गति से आगे बढ़ रहा है।
बैठक से पहले, दोनों मंत्रियों ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह कदम न केवल उनके साहस को सम्मानित करता है, बल्कि भारत की सुरक्षा यात्रा में स्थिरता और साझेदारी का प्रतीक भी है।

