ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायती कॉन्फ्रेंस (AJKPC) ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रशासित प्रदेश की बोझिल प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इसका कारण मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की भारी कमी को बताया।
AJKPC अध्यक्ष अनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से तुरंत मंत्रिपरिषद का विस्तार कर सभी रिक्त पदों को भरने की अपील की, ताकि शासन व्यवस्था सुचारू और प्रभावी हो सके।
शर्मा ने बताया कि इस समय जम्मू-कश्मीर की लगभग 1.5 करोड़ आबादी का प्रशासन केवल छह मंत्रियों (मुख्यमंत्री सहित) के कंधों पर टिका हुआ है। यह छोटा मंत्रिमंडल दो डिवीज़न, 20 ज़िले, 100 से अधिक विभाग, कई निगम और PSUs, 207 तहसीलें और करीब 6,800 गांवों का भार संभाल रहा है।
उन्होंने कहा,
“यह स्थिति अब नहीं चल सकती। प्रत्येक मंत्री के पास 5–6 महत्वपूर्ण विभाग हैं। चाहे कोई कितना भी सक्षम क्यों न हो, वह इन सभी विभागों को आवश्यक ध्यान, समीक्षा, समयबद्ध निर्णय और फील्ड सुपरविजन नहीं दे सकता। इसका परिणाम है फ़ाइलों का जमाव, निगरानी में कमी, निर्णयों में देरी और अंततः जनता की परेशानी।”
‘कैबिनेट विस्तार में देरी क्यों?’
AJKPC अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि मंत्रिपरिषद विस्तार में इतनी देरी का राजनीतिक कारण क्या है।
उन्होंने कहा,
“90 सदस्यीय विधानसभा में 41 विधायक होने के कारण नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास आरामदायक बहुमत है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री पिछले एक वर्ष से संविधान द्वारा अनुमति प्राप्त नौ मंत्रियों की पूर्ण संख्या का उपयोग नहीं कर रहे।”
शर्मा ने संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्रशासित प्रदेशों में मंत्रिपरिषद कुल विधानसभा सदस्यों की 10% संख्या तक हो सकती है। 90 सदस्यों के हिसाब से जम्मू-कश्मीर में नौ मंत्रियों की मंत्रिपरिषद का प्रावधान है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 53 का भी उल्लेख किया, जिसमें यह स्पष्ट रूप से दर्ज है।
शर्मा ने कहा,
“मंत्रिपरिषद विस्तार में कोई कानूनी या प्रशासनिक बाधा नहीं है। कानून स्पष्ट है और प्रशासनिक आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

