सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 15 नवम्बर 2023 को ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स (रैशनलाइज़ेशन एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस) एक्ट, 2021 की नियुक्ति, कार्यकाल और सेवा शर्तों से संबंधित कई प्रावधानों को असंवैधानिक करार दिया। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि इस कानून में केंद्र सरकार ने पहले से रद्द किए गए प्रावधानों को मामूली बदलाव के साथ पुनः लागू किया है। यह कार्रवाई न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
निर्णय में न्यायालय ने कहा कि यह विधायी ओवरराइड न्यायिक निर्णयों पर प्रतिकूल असर डालता है। CJI गवई ने कहा, “ऑर्डिनेंस और 2021 कानून में समानता स्पष्ट है, जिन धाराओं को पहले रद्द किया गया था, उन्हें फिर से लागू करना न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। इसलिए इसे असंवैधानिक घोषित किया जाता है।”
इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट ने यह उल्लेख किया कि लंबित मामलों की संख्या को कम करना केवल न्यायपालिका की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सरकार और अन्य संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। इस महत्वपूर्ण फैसले से न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
पुराने न्यायिक निर्देशों की बहाली के तहत, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आईटीएटी और सीईएसटीएटी के सदस्य 62 वर्ष की आयु तक सेवा में रहेंगे, जबकि चेयरपर्सन/प्रधान 65 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहेंगे।
निर्णय के विस्तृत कारण जल्द ही जारी होने की संभावना है।
पृष्ठभूमि की जानकारी
इससे पहले, 11 नवम्बर 2023 को इन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हुई थी, जिसमें 2021 कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 के तहत कई अपीलीय निकायों, जैसे फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलीय ट्रिब्यूनल को समाप्त कर दिया गया था। यह कानून न्याय प्रणाली के महत्वपूर्ण पहलुओं में व्यापक बदलाव के साथ आया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

