बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आज कश्मीर को “भारत का ताज” बताते हुए कहा कि क्षेत्र को अपनी राज्य व्यवस्था प्रभावी ढंग से चलाने के लिए सबसे पहले सामान्य स्थिति बहाल करनी होगी।
श्रीनगर स्थित हजरतबल दरगाह में हाजिरी देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में खान ने कहा कि उनका कश्मीर से संबंध कई दशकों पुराना है। उन्होंने कहा, “मैं पूरे भारत से कहना चाहता हूं कि कश्मीर हमारे सिर का ताज है।” उन्होंने यह भी बताया कि सार्वजनिक जीवन की शुरुआत से ही वे कश्मीर आते रहे हैं।
1980 के दशक में गृह मंत्रालय में अपने कार्यकाल को याद करते हुए खान ने कहा कि उस समय वे अलीगढ़ और अमृतसर में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों से अक्सर बातचीत किया करते थे। उन्होंने कहा, “मेरा कश्मीर के लोगों से बहुत पुराना रिश्ता है। आपकी मेहमाननवाज़ी की कोई मिसाल नहीं है।”
देश की राजनीति पर बात करते हुए खान ने कहा कि भारत का लोकतंत्र अब वंशवाद की परिभाषा से आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा, “हमारे लोकतंत्र में संप्रभुता नेताओं के पास नहीं, बल्कि जनता के पास है। एक साधारण परिवार में जन्मा व्यक्ति भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है।”
उन्होंने विभाजन और वर्षों की हिंसा से हुई पीड़ा पर भी गहरा दुख जताया। खान ने कहा, “जब कोई देश विभाजित होता है तो नफ़रत संस्थागत रूप ले लेती है, और कश्मीर के लोगों ने इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाई है।”
शांति और सामूहिक ज़िम्मेदारी की अपील करते हुए खान ने कहा कि पूरा भारत यह चाहता है कि कश्मीर अन्य राज्यों की तरह सामान्य ढंग से कार्य करे, लेकिन इसके लिए पहले शांति और स्थिरता जरूरी है। “भारत की इच्छा है कि कश्मीर भी अन्य राज्यों की तरह प्रगति करे, परंतु इसके लिए पहले सामान्य परिस्थितियाँ बनाना आवश्यक है,” उन्होंने कहा।
अंत में मानवता का संदेश देते हुए खान ने कहा कि जहाँ कहीं भी पीड़ा हो, वहाँ संवेदनशीलता और सहयोग हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “जहाँ दर्द है, वहाँ प्रतिक्रिया देना हमारा कर्तव्य है, क्योंकि एक स्थान की असुरक्षा हर जगह की सुरक्षा के लिए खतरा है।”

