मुख्य सचिव अतल डुल्लू ने आज एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें कश्मीर घाटी से फलों की खेपों को देश के विभिन्न बाजारों तक सुचारू रूप से पहुँचाने की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
बैठक में कश्मीर के संभागीय आयुक्त, परिवहन विभाग की सचिव अवनी लवासा, आईजी ट्रैफिक, परिवहन आयुक्त, कृषि उत्पादन विभाग के सचिव, एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक, एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जम्मू–श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) की वर्तमान स्थिति और उसकी पूर्ण रूप से बहाली की समीक्षा की। उन्होंने घाटी से फल से लदे ट्रकों की आवाजाही और बाहर से आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति पर भी जानकारी ली।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि कोई भी फल ट्रक राजमार्ग पर फंसा न रहे और संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि इन वाहनों को सुरक्षित और प्राथमिकता के आधार पर मार्ग प्रदान किया जाए। उन्होंने दोनों ओर फंसे वाहनों की शीघ्र निकासी के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कश्मीर के संभागीय आयुक्त को निर्देश दिया कि फलों की ढुलाई के लिए रेल माल सेवा शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए ताकि मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे प्रमुख बाजारों तक फलों को समय पर भेजा जा सके। इसके लिए फल उत्पादकों से संवाद करने और डीआरएम जम्मू के साथ समन्वय बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया।
संभागीय आयुक्त, कश्मीर ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि वर्तमान में पर्याप्त संख्या में ट्रक उचित किराए पर उपलब्ध हैं और फल उत्पादकों को कोई बड़ी समस्या नहीं है।
परिवहन सचिव अवनी लवासा ने बताया कि यदि किसी स्थिति में वाहनों की कमी आती है तो जेकेएसआरटीसी के ट्रक बेड़े को तैनात किया जाएगा ताकि फलों की खेप को घाटी से बाहर के बाजारों तक सुगमता से पहुँचाया जा सके।
मुख्य सचिव ने दोहराया कि प्रशासन बागवानी उत्पादों के निर्बाध परिवहन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है क्योंकि यह कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय बनाए रखें और सक्रिय कदम उठाएँ, ताकि पूरे फलों के मौसम में परिवहन व्यवस्था सुचारू बनी रहे।


