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Friday, June 5, 2026

भारत ने काबुल मिशन को दूतावास का दर्जा दिया, जयशंकर ने सुरक्षा चिंताओं पर तालिबान की संवेदनशीलता की सराहना की

भारत ने शुक्रवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अपने तकनीकी मिशन को पूर्ण दूतावास का दर्जा देने की घोषणा की। यह फैसला दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यह घोषणा नई दिल्ली में अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान की।

अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने अपने दूतावास से सभी अधिकारियों को वापस बुला लिया था। बाद में जून 2022 में भारत ने एक “तकनीकी टीम” को तैनात कर सीमित स्तर पर अपनी उपस्थिति बहाल की थी। अब दूतावास का दर्जा दिए जाने के साथ भारत अफगानिस्तान में मानवीय सहायता, बुनियादी ढांचा विकास और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

जयशंकर ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा, “आपकी यह यात्रा हमारे संबंधों को आगे बढ़ाने और भारत-अफगानिस्तान की स्थायी मित्रता की पुनः पुष्टि करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। पड़ोसी देश और अफगान जनता के शुभचिंतक के रूप में भारत आपके विकास और प्रगति में गहरी रुचि रखता है।”

उन्होंने कहा कि भारत की दीर्घकालिक साझेदारी, जिसके अंतर्गत अफगानिस्तान में कई प्रमुख परियोजनाएं पूरी की गई हैं, अब पुनः सक्रिय हो रही है। जयशंकर ने तालिबान प्रशासन द्वारा भारत की सुरक्षा चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की सराहना भी की, विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले के बाद।

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत और अफगानिस्तान दोनों का साझा लक्ष्य विकास, स्थिरता और समृद्धि है, लेकिन सीमा पार आतंकवाद दोनों देशों के लिए समान खतरा है। “हमें आतंकवाद के हर रूप और रंग के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा,” उन्होंने कहा।

अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने अपने वक्तव्य में भारत को क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देश बताया और कहा कि भारत ने हमेशा अफगान जनता का साथ दिया है। उन्होंने भारत द्वारा प्रदान की गई मानवीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया और व्यापार, शिक्षा व अवसंरचना क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।

काबुल में भारत के मिशन को दूतावास का दर्जा दिया जाना इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली तालिबान-शासित सरकार के साथ सावधानीपूर्वक लेकिन रणनीतिक पुनःसंवाद की दिशा में आगे बढ़ रही है — जिसका उद्देश्य सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अफगान जनता के साथ ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करना है।

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