जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने आज पिर पंजाल क्षेत्र की जनजातीय पहचान और मूल्यों की रक्षा के लिए सामूहिक एवं सतत प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
यह बयान उन्होंने सगरा, मेंढर (पुंछ) में आयोजित आदिवासी मेले में दिया। मंत्री ने कहा कि विकास कभी भी सांस्कृतिक क्षरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए, और उन्होंने परंपरा एवं प्रगति के बीच संतुलित दृष्टिकोण रखने की अपील की।
राणा ने चेतावनी दी कि अनियंत्रित आधुनिक प्रभाव आदिवासी रीति-रिवाजों और नैतिक मूल्यों को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने उमर अब्दुल्ला सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि उद्देश्य एक समावेशी, आत्मनिर्भर और मजबूत आदिवासी समाज का निर्माण करना है।
इस मौके पर उन्होंने विभाग और जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की और मेले को गरिमा के साथ विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस मेले में स्थानीय लोगों की बड़ी भागीदारी रही, जिसमें आदिवासी संस्कृति, परंपराएं, व्यंजन और ज्ञान प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया। इसमें पारंपरिक व्यंजन, औषधीय पौधों का प्रदर्शन और एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी शामिल था।
यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक रहा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार की विकास नीतियां जनजातीय समाज की वास्तविकताओं पर आधारित हैं।
इस अवसर पर डीडीसी पुंछ की चेयरपर्सन तज़ीम अख्तर, उपायुक्त पुंछ अशोक कुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।

